Posts

Showing posts from December, 2025

विद्युल्लता - समीक्षा

Image
    आत्मिका   " विद्युल्लता के स्पन्दन गीत"   कहते हैं कि हृदय के तारों पर मानवीय संवेदना के संघात से उत्पन्न आत्मस्वर ही गीत है अर्थात् गीत अपनी आत्मरागात्मिकता में जीवन का झंकृत स्वर है। अपने चारों ओर मौजूद विषय , वस्तु , प्रकृति , जीव , जगत की ओर संवेदनात्मक दृष्टि से देखने पर जो स्पन्दन महसूस होते हैं वे गति , यति , लय , स्वर , ताल में निबद्ध हो जावें तो गीत बन जाते हैं लेकिन कभी कभी ये स्वयं यह पूरा बाना पहन कर हृदय में खुद ही उतर आते हैं। लय सुंदरता की चरम विधा है और सुंदरता का सीधा सम्बन्ध हृदय से है। यही लय साहित्य में छंद का रूप धारण करती है। काव्य एवं संगीत विधान के लिए उपयुक्त शब्दों की लययुक्त व्यवस्था का नाम ही छंद है। इस कृति के लगभग सारे गीत भावनाओं , संवेदनाओं और स्वसौष्ठव स्वकीय ले कर उतरे हैं। "जो है जैसा है , यहाँ वैसे का वैसा है।" ' विद्युल्लता ', ' विद्युल्लता ' क्यों हुई:- विद्युत का भौतिक जीवन आधार - मेरी स्नातकीय शिक्षा विद्युत यांत्रिकी में हुई और बाद में मैं विद्युतयंत्री के रूप में सेवा रत रहा। वस्तुतः मेरा...